सच को नकाब बनाके झूठ ही छिपाए जाते हैं !
मौला मेरे दुश्मन भी तो घर में ही पाए जाते हैं !!
सलीका तो देखिये इनकी इश्क में आजमाने का,
हर रोज वफ़ा के नाम पे हम ही आजमाए जाते हैं !!
कल की कौन सोचेगा,आज की आज देखेंगे औ अभी,
कुछ मसले तो मुकम्मल मुल्क को खाए जाते हैं !!
किसे फुर्सत है जो जताए किसी और का शुक्रिया,
... बोतलों की खुमारी हमारी रगों में चढ़ाये जाते हैं !!
रफ़्तार इन दिनों बदल औ बढ़ गयी है मुल्क की,
हर कोई जानता है कागजी घोड़े जो दौडाए जाते हैं !!
लोग जो बदले तो बदल गयी सियासत “पंकज "
दुनिया में नब्ज टटोलने वाले भी तो पाए जाते हैं !!
मौला मेरे दुश्मन भी तो घर में ही पाए जाते हैं !!
सलीका तो देखिये इनकी इश्क में आजमाने का,
हर रोज वफ़ा के नाम पे हम ही आजमाए जाते हैं !!
कल की कौन सोचेगा,आज की आज देखेंगे औ अभी,
कुछ मसले तो मुकम्मल मुल्क को खाए जाते हैं !!
किसे फुर्सत है जो जताए किसी और का शुक्रिया,
... बोतलों की खुमारी हमारी रगों में चढ़ाये जाते हैं !!
रफ़्तार इन दिनों बदल औ बढ़ गयी है मुल्क की,
हर कोई जानता है कागजी घोड़े जो दौडाए जाते हैं !!
लोग जो बदले तो बदल गयी सियासत “पंकज "
दुनिया में नब्ज टटोलने वाले भी तो पाए जाते हैं !!